Thursday, 13 August 2015

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें
और अंगुली से हटाना तेरा

नजरें झुका के मुस्कुराना धीरे से
फिर हौले शर्माना तेरा
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

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