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जब मन के समंदर में भावना की कश्ती हिचकोले खाने लगती है
तब वो कलम के सहारे पन्ने पर उतर कर कविता का रूप ले लेती है



2 comments:

  1. नीतिश बाबू
    आई देखल अहांक ब्लॉग। नीक लागल। मुदा About me या कोनो आन टैब क्लिक कएला पर कोनो नहि खुजल। या त, बनल नहि अछि या खुजेैत नहि अछि।.
    मनोज पाठक

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  2. या इहो भ, सकैत अछि जे दू पांति अहां लिखने छी मन के समंदर ........वएह टा एत अछि
    मनोज पाठक

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