Thursday, 13 August 2015

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें
और अंगुली से हटाना तेरा

नजरें झुका के मुस्कुराना धीरे से
फिर हौले शर्माना तेरा
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, 26 February 2015

इक सांवरी की तिरछी निगाहें

नील वसन में लिपटी हुई मद भरी चंचल अदायें
वृन्दावन की रासलीला इक सांवरी की तिरछी निगाहें

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Saturday, 10 January 2015

शाम होते ही यादों की शमा जल जाती है

शाम होते ही यादों की शमा जल जाती है
जिंदगी के कारवाँ को रौशनी मिल जाती है
रात होते ही महक जाती है चंपा बेलियां
ये चाँदनी नवयौवना सी कर रही अठखेलियां

© नीतीश कर्ण
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Sunday, 4 January 2015

सतरंगी सपने किसलय का

बेजान जान मन चैन है खोया
मद्धम है स्पंद हृदय का

साँसों की सरगम होठों से
करती है विनय प्रणय का

आह्लादित कर देती मन को
कुछ जानी अंजानी बातें

रोमांचित कर देती तन को
सतरंगी सपने किसलय का

© नीतीश कर्ण
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07-06-2008

Friday, 2 January 2015

मन की सीमा रेखा

मन की सीमा रेखा
आकाश सा अनंत
और उस अनंत सागर में
बादलों की कश्ती पर
हिचकोले खाते हुए हम तुम
रोमांचित होते हुये
लहरों के थपेड़ो से
हाथ थामे हुये एक दुसरे का
ज़ोर से कस कर

© नीतीश कर्ण
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देकर अश्क आँखों में हंसायेगा कौन

देकर अश्क आँखों में हंसायेगा कौन
रूठ जाउं अगर मैं तो मनायेगा कौन

बालों की तरह उलझी उलझने सारी
मैं गर चला गया तो सुलझायेगा कौन

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)