गजल–3
झूकल नैनकेँ उठिते धरि
नैन नैनसँ मिलिते सउंसे
रातुक रानी गमकि गेलय
ओ पहिल नजरि जे हियमे
सोन सन जे चमकि गेलय
ओ छिलकैत मदिरा नैना स
नीतीश कनि बहकि गेलय
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
प्रेम बयार सिहकि गेलय
मोनक पंछी चहकि गेलय
मोनक पंछी चहकि गेलय
झूकल नैनकेँ उठिते धरि
धाप इज़ोर छिटकि गेलय
नैन नैनसँ मिलिते सउंसे
रातुक रानी गमकि गेलय
ओ पहिल नजरि जे हियमे
सोन सन जे चमकि गेलय
ओ छिलकैत मदिरा नैना स
नीतीश कनि बहकि गेलय
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
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