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Thursday, 21 December 2017

तोहर परफ्यूमक सुगंध

तोहर परफ्यूमक सुगंध
हमर टिसट और गेरुआ सं'
गमकेने अछि सगर मन के

ओना त सोझा अछि इहो
कनिक देरक लेल ठीक तोरे जांका
फेर घुलि जायत गेरुआ के अंतर्मन में
जेना की तू हमर आत्मा में
© नीतीश कर्ण

एतबे मनोरथ तोरा संगे

एतबे मनोरथ तोरा संगे
तोरा संग सब दिया-बाती
तोरे स' आशा परिभाषा
तोरे संग सब सांझी पराती

तू आशीर्वाद बैजू बाबा के
तू त्रिवेणीक घाट हमर
तुंही धर्म और तुंही ध्येय
तू छे जिनगीक बाट हमर

तुंही हमर सकल साधना
तोरा बिनु जिनगी वीरान
तूंही सबटा करम पूण्य
तुंही हमर गंगा स्नान

© नीतीश कर्ण

Thursday, 21 July 2016

नहुएं नहुएं

नहुएं नहुएं फेर तेजी
गालक ढलान सं'
टघरैत नोर
भिजबैत गेरुआ के पोरे-पोर

दलानक डिबिया सन
झिलमिलाईत जिनगी
गुंजैत सिसकी
गुज्ज अन्हार में चहुँओर

© नीतीश कर्ण
(लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, 9 October 2014

प्रेम बयार सिहकि गेलय

गजल–3

प्रेम बयार सिहकि गेलय
मोनक पंछी चहकि गेलय

झूकल नैनकेँ उठिते धरि
धाप इज़ोर छिटकि गेलय

नैन नैनसँ मिलिते सउंसे
रातुक रानी गमकि गेलय

ओ पहिल नजरि जे हियमे
सोन सन जे चमकि गेलय

ओ छिलकैत मदिरा नैना स
नीतीश कनि बहकि गेलय

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Wednesday, 24 September 2014

घोघ उठिते धरि बिगरि गेलय

गजल–2

घोघ उठिते धरि बिगरि गेलय
बात सीधा जे छल ओनरि गेलय

बंद बोतल शराब जकाँ छल
ओ खुलिते जेना चहरि गेलय

रूप पछवा देखि सिहकल मोन
पोरे-पोर जेना सिहरि गेलय

मजलिस मे जिनकर चर्चा छल
ओ नजरिमे एखन उतरि गेलै

नीतीशकेँ दूरेसँ सिहावइ छल
ओ दिन छल आब गुजरि गेलय

सरल वार्णिक बहर

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Tuesday, 23 September 2014

हम छी आइ बड्ड उदास तोरा बिनु

हम छी आइ बड्ड उदास तोरा बिनु
जिनगीमे किछु नै छै खास तोरा बिनु

मुँह मोडि लेले नै घुरि कऽ तकले तूँ
दुनियासँ करब की आस तोरा बिनु

चारु दिस महले महल ऐँठाँ मुदा
एहि शहरमे नै छै बास तोरा बिनु

हिया बनि गेल अछि नीरस एहन
नै बीते दिन राति आ मास तोरा बिनु

जीविते जिनगी मरि रहल नीतीश
आगू चलत कोना ई सांस तोरा बिनु

सरल वार्णिक बहर

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, 18 September 2014

नाम मेटायल,पहिचान हरायल

नाम मेटायल,पहिचान हरायल 
समय आयब गेल, अर्जन करू
चुप रहब, इतिहास मेट जायत
शेर छी आँहा गर्जन करू !!!
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

बिसरी गेल लोक गीत गोसाउनिक

बिसरी गेल लोक गीत गोसाउनिक, मारा-माछ आ मरुआ
मायक हाथ'क कुम्हरौरि, आ तिलकोर’क तरुआ

बिसरी गेल लोक पाग आ चानन, ओ अरिपन’क रीत
ठकरल टीक आ थिकरल धोती, ओ विद्यापति'क गीत

बिसरी गेल लोक माँटि'क चुलहा, अंगना के तुलसी चौरा
पेठीया के मूरही-कचरी-झिल्लि आउर सिंघारा

बिसरी गेल लोक गामक भोरहुकबा, ओ कौआ के कुचरल, अनघोल करैत सुगना
ओ बाबा वाला बडका दरव्वजा, बाबु-पितिया के साझी अंगना

बिसरी गेल लोक अपन राग-भाष, अपन साजो-सज्जा
ओ साँझी आउर पराती, ढोल-पिपही वाला बाजा

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

हम सक्षम छी,हम सबल छी

हम सक्षम छी,हम सबल छी
हम रणचंडी सन प्रबल छी
हम नागार्जुन क विचार छी
हम कोशी के धार छी

मिथिला राज्य अधिकार हमर अछि
मिथिले सs सरोकार हमर अछि
हम मिथिला मिथिला हमरा में
मिथिले जीवनक सार हमर अछि

हम महादेव क तेसर नेत्र छी
हम मॅंडन आयाची कs क्षेत्र छी
हम विद्यापतिक बयना छी
हम मिथिला राज्य निर्माण सेना छी


© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

जागू मैथिल भोर करू

माय मिथिला के पैर में बेरी,गुमनाम मैथिल संस्कार
मंगला सs तs भीख ने भेटत,लईड कs लिय अपन अधिकार

जनक ऋषि के वन्सज के, गरम खून किया पड़ल शिथिल
लेभरायल आँखिक काजरि, उजड़ल - उपटल माँ मैथिल

उपेक्षित जिंदगी बड जिलउँ,आब ने कनिको धीर धरू
बेर आईब गेल फूंकु पाञ्चजन्य,हर-हर महादेव उद्घोष करू

खून बिना आज़ादी कहाँ, आब उठाबू तीर-कमान
कटइ छई तs कईट जाओ गर्दन, बनल रहे पागक सम्मान

आशीर्वाद कोशी गंडक के, देखा दियउ रूप विकराल
माय मिथिला चित्कारि रहल अछि, बहा दियउ शोणित के धार

लिय टेंगारी लाठी भाला, परशुराम के रूप धरू
घोर अन्हरिया राइत बहुत भेल, जागू मैथिल भोर करू

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Monday, 15 September 2014

हम छी बड उदास तोरा बिन

हम छी बड उदास तोरा बिन
जिनगी में किछु नई खास तोरा बिन

मूह मोईड कs गेले ने तकले घुईर कs
दुनिया सs फेर की आस तोरा बिन

कना जाइये देखि कs तोहर घरक रस्ता
ई शहरि मे आब नई बास तोरा बिन

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

प्रेमक बसात

प्रेमक बुन्नी उमरि- उमरि, आई हमरा पर बरसल
हमर करेज के परती बारी में, प्रेमक गाछ आई उपजल

की जाने औ कौन मौसम छल, की जाने औ कौन नक्षत्र
हमर मनक अन्हार कोठरी में, भेल कोना इज़ोर सर्वत्र

आई धरि नई सोचलउं सपनों में, हमरो पर ई बरखा बरखत
मिलते देरी नैन नैन स’, हमरो पर ई बिजुरि करकत

नैन झुकेने ओ बैसल छल, मिलते नैन की जादू केलक
किछु कहितहुं किछु बाजि नई सकलहुं, की जाने कोन मन्त्र ओ पढ़लक

जानि प्रेमक मौसम छल ओ, किछु हमहुं अंदाज लगेलउं
कोना भिजलउं से बुझि नई सकलउं, तै बरसातक लाथ लगेलउं

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Wednesday, 10 September 2014

किया हम प्रीत लगेलहुँ

कोना सुनाबु हाल बिरह के नोर आँखि में आबईये
करेज मे एकता हुक उठल आ प्राण ठोर ताक आबईये

जानि कोन अपराध केलहु हम, जेकर सजा देलहु आहां हमरा
जिनगी हमर ओई फूल जाकाँ भेल, जेकर रस चुसलक कोनो भंवरा

निश्चहि घोर अपराध हमर छल, जे हम नेह लगेलहुँ
आब अहु सs बढी क सजा देब कि, जिबैत जान लs लेलहुँ

आबि गेल फेर आमक महिना, जखने गाछी में महुआ गमकल
हरियर भेल बेमाय करेजक, सुनबा सs कोयली के कु-कल

नैन बिछेने आइयो बाट पर, पैरा अहिं के तकैत छी
मन पता नै कतs लटकल अछि, नै सुतई छी नै जागई छी

ओहि अतीत मे तकबा के, हम अखनेहु इच्छा रखने छी
मुदा देह हमर सिहरी उठइये, जखन गप्प आहा के करैत छी

किछु बुईझ नै आबि पडेयै एहन कोन जुलुम हम केलहुँ
सभहे किछु गेल हराए, किया हम प्रीत लगेलहुँ

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)