Monday, 3 November 2014

एक साँवरी नज़रें झुकाये

भोली सी नयनाभिराम
पलकों पर सपने सजाये
बैठी है कुछ उलझी उलझी
एक साँवरी नज़रें झुकाये

ना नजर लगा देना तू चंदा
मेरे संग तेरी प्रति साये
सादगी की सुन्दर मूरत
आँखों पर चश्मा लगाये

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

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