चंचला स्वप्निल आँखें
सागर सी लहराती जुल्फें
वाराणसी की एक मंदिर
गंगोत्री सच्ची लगी
इक साँवरी अच्छी लगी
सागर सी लहराती जुल्फें
वाराणसी की एक मंदिर
गंगोत्री सच्ची लगी
इक साँवरी अच्छी लगी
सीधी-साधी थोड़ी टेढ़ी
वह कोरी होठों की गाली
एक मस्त पवन इक झंझावत
दीवानगी सच्ची लगी
इक साँवरी अच्छी लगी
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
वह कोरी होठों की गाली
एक मस्त पवन इक झंझावत
दीवानगी सच्ची लगी
इक साँवरी अच्छी लगी
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
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