Monday, 15 September 2014

अपनी आँखों से इक बार पिला दे साकी

अपनी आँखों से इक बार पिला दे साकी
इस दिवाने को भी मयकसी सिखा दे साकी

गिरता है तो गिर जाने दे दिल पर बिजली
अपने मुखड़े से तू चिलमन हटा ले साकी

झुलस रहा है मेरा दिल आतिशे गम में
आके तु मलहम लगा दे साकी

लोग कहते हैं थोड़ा उलझा हुँ मैं
अपने जुल्फ की तरह मुझको भी सुलझा दे साकी

छोड़ दूंगा पैमाने-पैमाने की आदत
ईक बार अपने आँखों से पिला दे साकी

दिल की हसरत पूरा कर दे मेरे जाने से पहले
सारा मयखाना अपने हाथों से पिला दे साकी

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

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