Wednesday, 24 September 2014

घोघ उठिते धरि बिगरि गेलय

गजल–2

घोघ उठिते धरि बिगरि गेलय
बात सीधा जे छल ओनरि गेलय

बंद बोतल शराब जकाँ छल
ओ खुलिते जेना चहरि गेलय

रूप पछवा देखि सिहकल मोन
पोरे-पोर जेना सिहरि गेलय

मजलिस मे जिनकर चर्चा छल
ओ नजरिमे एखन उतरि गेलै

नीतीशकेँ दूरेसँ सिहावइ छल
ओ दिन छल आब गुजरि गेलय

सरल वार्णिक बहर

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

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