गजल–2
बंद बोतल शराब जकाँ छल
ओ खुलिते जेना चहरि गेलय
रूप पछवा देखि सिहकल मोन
पोरे-पोर जेना सिहरि गेलय
मजलिस मे जिनकर चर्चा छल
ओ नजरिमे एखन उतरि गेलै
नीतीशकेँ दूरेसँ सिहावइ छल
ओ दिन छल आब गुजरि गेलय
सरल वार्णिक बहर
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
घोघ उठिते धरि बिगरि गेलय
बात सीधा जे छल ओनरि गेलय
बात सीधा जे छल ओनरि गेलय
बंद बोतल शराब जकाँ छल
ओ खुलिते जेना चहरि गेलय
रूप पछवा देखि सिहकल मोन
पोरे-पोर जेना सिहरि गेलय
मजलिस मे जिनकर चर्चा छल
ओ नजरिमे एखन उतरि गेलै
नीतीशकेँ दूरेसँ सिहावइ छल
ओ दिन छल आब गुजरि गेलय
सरल वार्णिक बहर
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)
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