Tuesday, 25 May 2021

आसमान में जब , गिरते तारों को देखोगी ।

 आसमान में जब , गिरते तारों को देखोगी ।

बादल के पीछे चंदा के , अभिसारों को देखोगी ।
घुप्प अंधेरी रातों में जब , जुगनू तुम्हें चिढायेगी ।
तीन बजे सुबह में जब , कॉफी की तलब सतायेगी ।
तब आंखें नम कर जाऊंगा ।
हाँ याद बहुत मैं आऊँगा ।
अपने बिखरे बालों को , तुम जब कभी संवारोगी ।
अपने गर्दन के तिल को , तुम जब कभी निहारोगी ।
तेरी प्यारी हंसी पर , जब कोई तारीफ सुनायेगा ।
गुनगुन करके भँवरा , जब कोई मंडरायेगा ।
तब आंखें नम कर जाऊँगा ।
हाँ याद बहुत मैं आऊँगा ।
© नीतीश कर्ण

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