Tuesday, 25 May 2021

गामक बसलोचना

 गामक बसलोचना

लिखैत अछि कविता
खेतक' पन्ना पर
कोदाइरक कलम सँ
उताईर दैत अछि
अपन परिकल्पना
उसर जमीन पर
आ फूँकि दैत छै जान
अपन घाम सँ
सिमसल एकहकटा द'ल मे।
अपन विधा मे
जेना निपुण कवि
करैत अछि
एकटा जीवंत चित्रण
अपन शब्दक वितान सँ!
© नीतीश मैथिल

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