Tuesday, 25 May 2021

रातुक बिचला पहर

 रातुक बिचला पहर

बरेरीक करकराहट सँ
अकचकाईत हमर एकाकी
फट्टकसँ आवैत हवा में
सहटैत तोहर स्पर्श
लावणि पर
झलफलाईत तोहर बिंब
और दुरखाके सन्नाटा में
अभरैत तोहर पदचाप
ओह ! ई अधिरतिया
और बतहा मन ।
© Nitish Karn

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