Tuesday, 25 May 2021

आधे-अधूरे सुनहरे ख्वाबों वाली जिंदगी ।

आधे-अधूरे सुनहरे ख्वाबों वाली जिंदगी ।
सिरहाने से लिपटी किताबों वाली जिंदगी ।
मेरा एक कॉल और उनका आना छम से ।
बालकनी से मस्त नजारों वाली जिंदगी ।
उनिन्दी आंखें और बिखरी जुल्फें ।
उस गली में चाँद सितारों वाली जिंदगी ।
तमाम उम्र निकल जाये शायद ही चुका पायें ।
उनके मुस्कुराहट की ये कर्जदारों वाली जिंदगी ।
साथ चलना मगर ना किस्मत में मिलना ।
नदी के दोनों किनारों वाली जिंदगी ।
© नीतीश कर्ण

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