Tuesday, 25 May 2021

मंजिलों के हर नये सवाल में सुकून है

 मंजिलों के हर नये सवाल में सुकून है ।

कर्म पथ पे आये हर बवाल में सुकून है ।
खौलने से ही अगर लायेगी रंग जिंदगी ।
चाय की तरह हर उबाल में सुकून है ।
© Nitish Karn

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