गजल
तोहर नेहक इजोरिया पसारि लितियौ
मोनक आंगनमे चन्दा उतारि लितियौ
तोरा बूझल छौ तोहर मुस्की खातिर
अपन दुनियाँ हम अपनेसँ उजारि लितियौ
अकानल सन तूँ सब रूसल मनोरथ छै
सब टा रचि-रचि सेहन्ता पखारि लितियौ
तूँ तकिते नै घुरि जों महफा ओहारसँ
सांस हृदयमे अटकल हम ससारि लितियौ
नै देखितौं तोहर हम कहियो मुँह मलिन
सब पीरितियाके खिस्सा बिसारि लितियौ
बहरे मीर (2x11)