सिरमा लग बैसल हमर निन्न
हेरैत फोनक गैलरी
बिछैत आहाँक ईयाद
ख'ने असगन्नी पर झुलैत
महसूस करैत हमर अकुलाहटि
ख'ने देखैत हमर बखराके स्वप्न
गेरुआ पर औंघाईत
© Nitish Maithil
सिरमा लग बैसल हमर निन्न
मंजिलों के हर नये सवाल में सुकून है ।
रातुक बिचला पहर
मनमे अनकहल गप्प आ
मोनक सीमा रेखा
जगते रहना सपने बुनना
हम सरिता चंचल निर्झर
हम गंगा पावन अविरल