Tuesday, 25 May 2021

रातुक बिचला पहर

 रातुक बिचला पहर

बरेरीक करकराहट सँ
अकचकाईत हमर एकाकी
फट्टकसँ आवैत हवा में
सहटैत तोहर स्पर्श
लावणि पर
झलफलाईत तोहर बिंब
और दुरखाके सन्नाटा में
अभरैत तोहर पदचाप
ओह ! ई अधिरतिया
और बतहा मन ।
© Nitish Karn

तोहर एक नजरि हमरा लेल ।

 तोहर एक नजरि हमरा लेल ।

जेना जेठक तरासल धरती
तृप्त भेल होयक
आर्द्रा के पहिल अछार सँ' ।

मनमे अनकहल गप्प आ

 मनमे अनकहल गप्प आ

मुट्ठी में दबने हुनक न'हक चेन्ह
ल' क' चलल इ बतहा मन गंगाक ओहि पार
हमर चलिते त' सजा लितहुँ
महादेव जेकाँ माथ पर अपन गंगाके
नहि त' भागीरथ बनि उतारि लितहुँ अपन अंगना में!

मोनक सीमा रेखा

 मोनक सीमा रेखा

अनंत आकाश जेना
आ ओई अनंत सागर में
मेघक नाह पर
झिझिर कोना खेलाइत हम तौं
भुलकैत सिहरैत लहरिके झिंसी स'
हाथ धेने एक दोसरक जोर सँ कसि क' ।

जगते रहना सपने बुनना

 जगते रहना सपने बुनना

बातें करना तकिये से ।
आते जाते सांसे गिनना
प्यार में हमने ये पाया है ।
© Nitish Karn

हम सरिता चंचल निर्झर

 हम सरिता चंचल निर्झर

हम गंगा पावन अविरल

हम कमला के शीत पवन
हम कुशहा सन रौद्र अटल!
Nitish Karn

क्षितिज के कोने से

 क्षितिज के कोने से पूरी चाँद..

निहारती अनवरत अधूरी ख्वाहिशों को ।

Thursday, 21 December 2017

तोहर परफ्यूमक सुगंध

तोहर परफ्यूमक सुगंध
हमर टिसट और गेरुआ सं'
गमकेने अछि सगर मन के

ओना त सोझा अछि इहो
कनिक देरक लेल ठीक तोरे जांका
फेर घुलि जायत गेरुआ के अंतर्मन में
जेना की तू हमर आत्मा में
© नीतीश कर्ण

एतबे मनोरथ तोरा संगे

एतबे मनोरथ तोरा संगे
तोरा संग सब दिया-बाती
तोरे स' आशा परिभाषा
तोरे संग सब सांझी पराती

तू आशीर्वाद बैजू बाबा के
तू त्रिवेणीक घाट हमर
तुंही धर्म और तुंही ध्येय
तू छे जिनगीक बाट हमर

तुंही हमर सकल साधना
तोरा बिनु जिनगी वीरान
तूंही सबटा करम पूण्य
तुंही हमर गंगा स्नान

© नीतीश कर्ण

Friday, 21 April 2017

और तुम

इक चुटकी चाँद
इक कतरा बारिश
थोड़ी सी चांदनी
और तुम


इक मुठ्ठी आंगन
थोड़ा सा बचपन
माँ का आँचल
और तुम

©नीतीश कर्ण

Thursday, 21 July 2016

नहुएं नहुएं

नहुएं नहुएं फेर तेजी
गालक ढलान सं'
टघरैत नोर
भिजबैत गेरुआ के पोरे-पोर

दलानक डिबिया सन
झिलमिलाईत जिनगी
गुंजैत सिसकी
गुज्ज अन्हार में चहुँओर

© नीतीश कर्ण
(लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Wednesday, 29 June 2016

जाती हो तो जाओ ...

मौसम बेवक्त ही बरसेंगे 
नैन दरश को तरसेंगे 
मौन जुबां बस रह जायेगा 
जाती हो तो जाओ ...

स्वप्निल आँखें सूने होंगे 
जिवन किसलय मुर्झायेंगे 
शबनम को तृण तरसेगा 
जाती हो तो जाओ ...

खाली करवट रातें होगी 
बेनूर सिलवट सौगातें होगी 
बाती संग दिल भी जलेगा 
जाती हो तो जाओ ...

© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, 13 August 2015

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें

तेरी होठों पे अटकी वो पानी की बूंदें
और अंगुली से हटाना तेरा

नजरें झुका के मुस्कुराना धीरे से
फिर हौले शर्माना तेरा
© नीतीश कर्ण
(कॉपीराइट अधिनियम के अनुरूप लेखक नीतीश कर्ण के अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित)